सावन (Sawan) महीना
सावन (Sawan) महीना हिंदू कैलेंडर में छठा महिना है जिसे संस्कृत में श्रावण भी कहते हैं. श्रावण हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह से प्रारंभ होने वाले वर्ष का पांचवा महीना है, जो ईस्वी कलेंडर के जुलाई या अगस्त माह में पड़ता है. इसे वर्षा ऋतु का महीना भी कहा जाता है, क्योंकि इस समय भारत में काफी वर्षा होती है (Monsoon Season).
श्रावण मास शिवजी को विशेष प्रिय है. सावन के महीने में शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इस महीने में पड़ने वाला सोमवार अति पावन माना जाता है. सावन के हर सोमवार को श्रद्धालु व्रत रखते हैं और शिवलिंग की खास पूजा करते हैं (Monday in Sawan). सारे मासों में श्रावण महादेव को अत्यंत प्रिय है
सावन (Sawan) महीना हिंदू कैलेंडर में छठा महिना है जिसे संस्कृत में श्रावण भी कहते हैं. श्रावण हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह से प्रारंभ होने वाले वर्ष का पांचवा महीना है, जो ईस्वी कलेंडर के जुलाई या अगस्त माह में पड़ता है. इसे वर्षा ऋतु का महीना भी कहा जाता है, क्योंकि इस समय भारत में काफी वर्षा होती है (Monsoon Season).
इस बार 11 जुलाई से सावन की शुरुआत होने जा रही है और 9 अगस्त 2025 को समापन। खास बात यह है कि सावन में सृष्टी का संचालन स्वयं महादेव के हाथों में होता है, इसलिए शिव पूजन का फल साधक को अवश्य प्राप्त होता है। वहीं इस वर्ष सावन ज्योतिष दृष्टि से भी खास होने वाला है, क्योंकि इस माह ग्रहों का विशेष संयोग बन रहा है।
दरअसल, 13 जुलाई 2025 को न्याय के कारक शनि वक्री होने जा रहे हैं। इसके अलावा 28 जुलाई 2025 को बुध वक्री होंगे। हालांकि राहु-केतु पहले से वक्री अवस्था में हैं। ग्रहों के इस दुर्लभ संयोग से कुछ राशि वालों को विशेष लाभ की प्राप्ति संभव है।
कब है पहला व्रत और क्यों है इतना खास?
श्रावण मास को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस पूरे महीने शिव जी धरती पर वास करते हैं और अपने भक्तों की पुकार पर विशेष कृपा बरसाते हैं। इसीलिए श्रावण के सोमवार को किया गया व्रत और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। इस बार सावन का पहला सोमवार, यानी 'प्रथम श्रावणी सोमवार', 14 जुलाई 2025 को पड़ रहा है। इस दिन अगर कोई व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से भगवान शिव की पूजा करता है, तो शिवजी उसकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। 3यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ होता

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